1.संघ कॉर्डेंटा (Phylum Chordata)
कॉर्डेटा संघ जन्तु जगत के सर्वाधिक जटिल, सुविकसित जन्तुओं का
संघ है। यह द्विपाश्श्व सममित, त्रिकोरकी, देहगुहीय जन्तु है। इनके विशिष्ट लक्षण निम्नलिखित हैं!
(1) नोटोकॉर्ड (Notochord) - आहार नाल व पृष्ठीय तन्त्रिका तन्त्र के
बीच छड़ (rod) जैसी संरचना नोटोकॉर्ड जीवनकाल में कभी न कभी
उपस्थित होती है। उच्च कॉर्डेट जन्तुओं में नोटोकॉर्ड रीढ़ की हड्डी द्वारा
प्रतिस्थापित हो जाती है। यह संरचना पेशियों के जुड़ने के लिए स्थान प्रदान करती है।
(2) पृष्ठीय खोखला तन्त्रिका रज्जु (Dorsal hollow nerve
cord)-तंत्रिका रज्जु खोखला व पृष्ठ सतह पर होता है।
(3) ग्रसनीय क्लोम दरारें (Pharyngeal gill slits) - कॉर्डेंट
जन्तुओं के जीवन की किसी न किसी अवस्था में जोड़ी में ग्रसनीय क्लोम दरारें पायी जाती हैं। मछलियों में यह पूरे जीवन उपस्थित रहती हैं, लेकिन अन्य उच्च कशेरुकियों में यह केवल भ्रूणीय अवस्था में पायी जाती है।
(4) पश्च गुर्दीय पूँछ (Post anal tail)- मलद्वार के बाद में पूँछ की
उपस्थिति भी प्रमुख कॉर्डेंट लक्षण है।
तंत्रिका रज्जु
प्रोटोकॉर्डेटा (Protochordata)
प्रोटोकॉर्डेटा, कॉर्डेटा संघ का एक उपसंघ (Subphylum) है। इसमें
सम्मिलित जन्तु आदिम प्रकार के कॉ्डेंट कहे जाते हैं अर्थात् वह कार्डेंट जो वर्टीब्रेट (Vertebrate) नहीं हैं, प्रोटोकॉर्डेट कहलाते हैं।
ये समुद्री (marine) जन्तु हैं। नोटोकॉर्ड जीवन की किसी न किसी
अवस्था में अवश्य उपस्थित होती है।
सामान्य उदाहरण हैं- बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus),हर्डमानिया
(Herdmania), एम्फिऑक्सस (Amphiocus)।
संघ है। यह द्विपाश्श्व सममित, त्रिकोरकी, देहगुहीय जन्तु है। इनके विशिष्ट लक्षण निम्नलिखित हैं!
(1) नोटोकॉर्ड (Notochord) - आहार नाल व पृष्ठीय तन्त्रिका तन्त्र के
बीच छड़ (rod) जैसी संरचना नोटोकॉर्ड जीवनकाल में कभी न कभी
उपस्थित होती है। उच्च कॉर्डेट जन्तुओं में नोटोकॉर्ड रीढ़ की हड्डी द्वारा
प्रतिस्थापित हो जाती है। यह संरचना पेशियों के जुड़ने के लिए स्थान प्रदान करती है।
(2) पृष्ठीय खोखला तन्त्रिका रज्जु (Dorsal hollow nerve
cord)-तंत्रिका रज्जु खोखला व पृष्ठ सतह पर होता है।
(3) ग्रसनीय क्लोम दरारें (Pharyngeal gill slits) - कॉर्डेंट
जन्तुओं के जीवन की किसी न किसी अवस्था में जोड़ी में ग्रसनीय क्लोम दरारें पायी जाती हैं। मछलियों में यह पूरे जीवन उपस्थित रहती हैं, लेकिन अन्य उच्च कशेरुकियों में यह केवल भ्रूणीय अवस्था में पायी जाती है।
(4) पश्च गुर्दीय पूँछ (Post anal tail)- मलद्वार के बाद में पूँछ की
उपस्थिति भी प्रमुख कॉर्डेंट लक्षण है।
तंत्रिका रज्जु
प्रोटोकॉर्डेटा (Protochordata)
प्रोटोकॉर्डेटा, कॉर्डेटा संघ का एक उपसंघ (Subphylum) है। इसमें
सम्मिलित जन्तु आदिम प्रकार के कॉ्डेंट कहे जाते हैं अर्थात् वह कार्डेंट जो वर्टीब्रेट (Vertebrate) नहीं हैं, प्रोटोकॉर्डेट कहलाते हैं।
ये समुद्री (marine) जन्तु हैं। नोटोकॉर्ड जीवन की किसी न किसी
अवस्था में अवश्य उपस्थित होती है।
सामान्य उदाहरण हैं- बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus),हर्डमानिया
(Herdmania), एम्फिऑक्सस (Amphiocus)।
2.प्रोटोकॉर्डेटा (Protochordata)
प्रोटोकॉर्डेटा, कॉर्डेटा संघ का एक उपसंघ (Subphylum) है। इसमें
सम्मिलित जन्तु आदिम प्रकार के कॉ्डेंट कहे जाते हैं अर्थात् वह कार्डेंट जो वर्टीब्रेट (Vertebrate) नहीं हैं, प्रोटोकॉर्डेट कहलाते हैं।
ये समुद्री (marine) जन्तु हैं। नोटोकॉर्ड जीवन की किसी न किसी
अवस्था में अवश्य उपस्थित होती है।
सामान्य उदाहरण हैं- बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus),हर्डमानिया
(Herdmania), एम्फिऑक्सस (Amphiocus)।
(A)बैलेनोग्लोसस जैसे जीवों को पहले प्रोटोकॉर्डेंट माना जाता था,लेकिन
कार्डेट संघ के किसी भी आधारभूत लक्षण को प्रदर्शित न करने के
कारण इन्हें अब हेमीकॉर्डेंट (Hemichordate) समूह में वर्गीकृत
किया गया है। इन्हें अब नॉन-कॉर्डेंट ही माना जाता है
सम्मिलित जन्तु आदिम प्रकार के कॉ्डेंट कहे जाते हैं अर्थात् वह कार्डेंट जो वर्टीब्रेट (Vertebrate) नहीं हैं, प्रोटोकॉर्डेट कहलाते हैं।
ये समुद्री (marine) जन्तु हैं। नोटोकॉर्ड जीवन की किसी न किसी
अवस्था में अवश्य उपस्थित होती है।
सामान्य उदाहरण हैं- बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus),हर्डमानिया
(Herdmania), एम्फिऑक्सस (Amphiocus)।
(@IMPORTANT@)
(A)बैलेनोग्लोसस जैसे जीवों को पहले प्रोटोकॉर्डेंट माना जाता था,लेकिन
कार्डेट संघ के किसी भी आधारभूत लक्षण को प्रदर्शित न करने के
कारण इन्हें अब हेमीकॉर्डेंट (Hemichordate) समूह में वर्गीकृत
किया गया है। इन्हें अब नॉन-कॉर्डेंट ही माना जाता है



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